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Wednesday, November 21, 2018

गोवा फिल्म फेस्टिवल में पहुंची ये अनोखी फिल्म, 'मुसहरों' के घरों में रहे कलाकार

असली जनजातीय लोगों के साथ शूटिंग के लिए बिहार के 'मुसहर' टोले में ठहरी पूरी फिल्म की कास्ट


"साल 2017 की बात है जब फिल्म 'भोर' के निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह से मुंबई में मुलाकात हुई और उस समय वो इस फिल्म के लिए तैयारी कर रहे थे. उनके पास राधिका आप्टे से लेकर स्वरा भास्कर तक को इस फिल्म में लेने का ऑप्शन था लेकिन उन्होंने एक नई कास्ट को लेने का मन बना लिया था. हंसमुख कामाख्या ने बड़े गंभीर शब्दों में कहा था, मेरी फिल्म को देखकर कोई ये नहीं कहेगा कि एक्टिंग और अच्छी हो सकती थी."

अब उनकी फिल्म 'भोर' सामने निकल कर आई है और इसकी शूटिंग के लिए वो इतने कठोर हो जाएंगे ये सोचना मुश्किल था, पर वो कैमरा के सामने रियल कंटेंट लाना चाहते थे और इसलिए उन्होंने अपनी कास्ट के साथ अपने क्रू को मुसहरों के बीच ठहराया और उनके कपड़े पहनाए, उनकी समस्याओं को समझाया.

कामाख्या बताते हैं, "मेरा मकसद है लोगों को समझाना कि हम शहरी लोगों से मीलों दूर बैठे जनजातीय लोगों की कई समस्याएं बिल्कुल वैसी ही हैं, जैसी हमारी. बस हम उन्हें देख नहीं पाते."
Bhor Movie
इस साल गोवा फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा रही 'भोर' की कहानी बुधनी नाम की लड़की के इर्द गिर्द घूमती है जो बिहार की मुसहर जाति से आती है. बुधनी के जीवन के छोटे छोटे संघर्ष जैसे - पढ़ाई पूरी करने का सपना, अपने घर में शौचालय होना, सम्मान की ज़िंदगी जीना जैसी चीज़ें इस फिल्म को असलियत के इतना करीब ला देते हैं कि आपके रोंगटे खड़े हो सकते हैं.

निर्माता अंजनि कुमार सिंह इस फिल्म के लिए बड़े कलाकारों की फौज की जगह बिहार के एक मुसहर टोले के लोगों को ही बतौर एक्टर लेकर आए हैं. इस फिल्म में कहानी है सपनों की, सपनों के टूटने की और सतत चलने वाले संघर्ष की.

गोवा फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा रही इस फिल्म को जल्द ही भारत में रिलीज़ किया जाएगा. कामाख्या बताते हैं, "शहरों में चल रहे #MeToo अभियान से बहुत दूर लोग ऐसी लड़ाइयों को लंबे समय से लड़ रहे हैं और हम चाहते हैं कि लोग इस बात को समझे की अभी ज़मीनी स्तर पर बहुत काम करना बाकी है."
छोटे लोगों के, बड़े सवालें को उठाने वाली एक फिल्म है जिसके बारे में शाहरुख या आमिर की किसी फिल्म जितनी चर्चा नहीं होगी. लेकिन नई कहानियों के इस दौर में ये एक बेहतरीन प्रयास है जिसे सराहा जाना चाहिए.

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